President Draupadi Murmu : आज मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं

 

President Draupadi Murmu


 मुर्मू ने कहा कि जीवन का अर्थ केवल लोगों की सेवा करके ही समझा जा सकता है मुर्मू का पहला वक्तव्य जनजातीय अभिवादन ‘जोहार’ से शुरू हुआ और भारत की जनजातीय संस्कृति और विरासत से ओतप्रोत रहा|

उन्होंने कहा की प्राचीन भारतीय परंपराओं ने इसी जीवन शैली को बढ़ावा दिया है, आज इसका महत्व बढ़ गया है। जनजातीय समुदायों ने प्रकृति से केवल जरूरत भर का लेना और उसकी भरपाई करना भी सिखाया है।

ओडिशा के एक छोटे से गांव से कॉलेज पहुंचने वाली मैं पहली लड़की बनी। हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ मिलजुल कर रहती आई है। इसी वजह से मैंने मानव जीवन के लिए जंगलों और नदी-तालाबों का महत्व समझा।

 उन्होंने ये भी कहा की  मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं भारत का नेतृत्व करते हुए और ये भी कहा कि कोरोना महामारी की लड़ाई में भारत के लोगों ने जिस संयम, साहस और सहयोग का परिचय दिया, वह एक समाज के रूप में हमारी बढ़ती हुई शक्ति और संवेदनशीलता का प्रतीक है।


   


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जीवन हमेशा संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने 1984 में पहली संतान खोई। 2010 में उनके 25 वर्षीय बेटे लक्ष्मण का निधन हुआ, तो तीन साल बाद उनके छोटे बेटे सिपुन की भी मौत हो गई। मुर्मू संभलने के लिए संघर्ष कर ही रही थीं कि 2014 में पति श्याम चरण मुर्मू की भी मौत हो गई। लगातार तीन सदमे से वह अवसाद में आ गईं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  शाकाहारी हैं और वो तीन बजे जगने के साथ ध्यान से दिन की शुरुआत करती है  उनकी  बेटी का नाम इतिश्री हैं जो एक बैंक अधिकारी हैं। 


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